सर, अभी अभी खबर मिली है, दीपू बहुत उत्साहित था
क्या, विशाल ने पूछा
सर तख्ता पलट होने वाला है, दीपू बोला
क्या मतलब...विशाल ने पूछा
सीईओ जाने वाला है।
विशाल के चेहरे पर मुस्कान थी।
सर हंस क्यो रहे हैं, दीपू ने पूछा
यार ये तो चलता रहता है।
इस बार नहीं चलेगा। सीईओ बदला जाएगा। मैनेजमेंट बिल्कुल भी खुश नहीं है।15 करोड़ खर्च हो चुके हैं। सीईओ जिम्मेदारी लेने को तैयार नही है। एक साल में सिर्फ 15 लाख का बिजनेस हुआ है। ऐसा लग रहा था दीपू प्रोड्यूसर नहीं सीओओ हो। चैनल के लिए बहुत चिंतित था।
11 महीनो में चैनल सिर्फ 3 महीने दिखा है। बिजनेस कहां से आएगा। विशाल ने तर्क दिया।
कुछ भी हो धंधा तो नहीं आया ना। सीईओ तो जाएगा ही साथ ही उसके लोग भी जाएंगे। एक लिस्ट बन रही है। दीपू आंख दबा कर बोला।
विशाल भी तो सीईओ का आदमी था। उसकी जिज्ञासा और बढ़ गई थी।
खबर पक्की है क्या...
एकदम पक्की है सर, दीपू बोला...
तुझे किसने बताया
“मेरी एमडी और चेयरमैन से बात हुई थी” दीपू विशाल की आंखो में आंखे डाल कर बोला।
सीईओ को बहुत गाली दे रहे थे। लेकिन आप बिल्कुल चिंता मत करिए मैं संभाल लूंगा।
बस जो भी लिस्ट बने , उस पर अपनी मोहर लगा देना। दीपू की अकड़ देखने वाली थी।
दीपू की हरकते देख कर विशाल का सर भन्नाने लगा था। अचानक ही वो चाल साल पीछे चला गया।
सर आपसे कोई मिलने आया है...रिसेप्शनिस्ट बोली
मैं अभी किसी से नहीं मिल सकता...विशाल ने कहा
सर, जेएस ने कहा है आपसे मिलने के लिए...रिसेप्शनिस्ट ने कहा।
जेएस भी ना बस...सब को मेरे पीछे बांध दो। जो चुतिया खुद से नहीं संभलता उसे मेरे पीछे बांध देते हैं। विशाल फोन पटकते हुए झल्ला रहा था। ठीक है भेज दो...
सर, एक हल्की सी आवाज केबिन का दरवाजा खोलते ही।
आओ बैठो, विशाल ने कुर्सी की तरफ इशारा करते हुए कहा
एक शर्मिला, गोरा चिट्टा लड़का विशाल के सामने बैठा था।
बताओ क्या काम है...क्या नाम है तुम्हारा
सर, दीपू, जेएस ने कहा था आपसे मिल लूं।
किस लिए...
सर नौकरी चाहिए, उसने बायोडाटा आगे बढ़ाते हुए कहा।
यार देखो, चैनल आने में अभी वक्त है। जितने लोग अभी चाहिए थे वो रख लिए गए हैं। 15-20 दिन बाद फोन कर लेना। देखते हैं क्या हो सकता है। विशाल बायोडाटा देखते हुए बोला।
सर, आपके ही हाथ में है सबकुछ। बड़ी उम्मीद ले कर आया था। जेएस ने भी कहा है कि अगर आपको जरूरत है तो रख ले। मैने जेएस के पुराने चैनल में भी काम किया है। नीनू मेरे बॉस थे। नीनू भी जेएस के चेले हैं। दीपू ये सब बड़ी हल्की जुबान में बोल रहा था।
यार मैने कहा ना 15-20 दिनो में फोन कर लेना। मै पूरी कोशिश करूंगा। चापसूली भरी बातो से विशाल को खुंदक आने लगी थी।
सर, एक महीने के लिए इंर्टरनिश के लिए ही रख लो। काम पसंद आए तो सैलरी डिसाइड कर लेना। दीपू ने कहा...
हम्म्म....ये ठीक रहेगा। अगर लड़का ठीक हुआ तो रख लेंगे वर्ना.......विशाल मन ही मन सोच रहा था।
ठीक है। एक महीने की इंर्टनशिप के बाद सैलरी डिसाइड करेंगे। विशाल ने बायोडाटा पर कुछ लिखते हुए कहा।
ठीक है सर, मैं कब से आ जाऊ। दीपू आंठ दबा कर हंस रहा था मानो आधी जंग उसने जीत ली हो।
आज से ही शुरू करते हैं। तुम मेरे अंडर ही काम करोगे। एक कैरियर के उपर प्रोग्राम बनान है। उसकी रूपरेखा तैयार करो, इंस्टीट्यूट लाइनअप करो और पायलट शूट करने की तैयारी करो। मै भी शूट पर चलूंगा। विशाल दीपू को समझाते हुए बोला...
दीपू अपने काम में ठीक था। बहुत ही जुगाडू... ऐसा लगता था मानो जुगाड़ ही उसके जीवन का मूलमंत्र है। दिन बीतते गए...अब विशाल को भी दीपू की आदत सी होने लगी थी। चैनल की सारी खबरे दीपू के पास होती थी जो की वो विशाल को बताया करता था। इतना मृदुभाषी, निष्ठावान, ईमानदार, व्यक्ति विशाल को आजतक नहीं मिला था। विशाल अब दीपू पर आंख बंद कर विश्वास करने लगा था। दीपू ने हर तरह से विशाल का दिल जीत लिया था। एक महीना पूरा होते ही, दीपू को आठ हजार की सैलरी पर रख लिया गया। विशाल के आगे पीछे घूमने वाला दीपू अब एक असिस्टेंट प्रोडयूसर के पद पर लग चुका था।
सर, सर क्या सोच रहे हैं...दीपू विशाल का हाथ हिला कर बोल रहा था।
कु....कुछ नहीं। विशाल ने कहा...
सर मैं बोल रहा हूं ना, आप बिल्कुल परेशान ना हो। बस जो मैं कहूं वो ही करें...
दीपू क्या मैनेजमेंट चैनल चलाना चाहता है ? चैनल कहीं भी नहीं दिख रहा है। गाड़ी वाले की पेमेंट भी नहीं हुई है। आज 16 तारीख है, सैलरी अभी तक नही मिली है। मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है। तिम तो मानेजमेंट के नजदीक हो...वो क्या सोच रहे हैं ? विशाल ने दीपू से पूछा...
जब तक ये सीईओ है वो पैसा नहीं लगाएंगे। दीपू के चेहरे पर कुटील मुस्कान थी। वो जल्दी ही कोई डिसीजन लेंगे। दीपू के हाव भाव देखने वाले थे। विशाल ने दीपू को ऐसे कभी नहीं देखा था। वो एक ऐसे सांड की तरह हो चुका था, जिसको संभाल पाना हर एक के बस की बात नहीं थी।
अरे वीनू गेस्ट आ गए क्या...कौन आ रहे है। नई होमलोन रेट या आरबीआई का डाटा भिजवा दो, आज गेस्ट से यही बात करेंगे। विशाल ने फोन पर बोला...सात बज रहे थे...आज का लाइव शो विशाल को करना था।
जब से डिस्ट्रीब्यूसन निल हुआ है, लाइव शो करना मुश्किल हो गया है...विशाल बुदबुदाया।
सर, बस आप देखते जाओ...हम बहुत जल्द टाटा या डिश टीवी पर आने वाले हैं...एम डी ने मुझसे कहा है...दीपू बोला
यार तेरे पास काफी खबरे हैं। काफी नजदीक हो गया है तू...मेरा भी नम्बर आने वाला है क्या...बोरिया बिस्टर बांध लूं...विशाल हंसते हुए बोला,
अरे क्या सर, आप क्या बात करते हैं...आप तो सेफ जोन में है...सब सेटिंग हो चुकी है...दीपू हंस रहा था।
अच्छा भाग यहां से...लाइव का टाइम हो गया है...मेकअप भी करवाना है...और हां 8:30 बजे बात करना...कुछ और खबर हो तो देना।
गाड़ी हाईवे पर आ चुकी थी। विशाल को अंदर से लग रहा था कि अब टाइम खत्म। ट्रक, बसें, आटो सब पीछे छूतते जा रहे थे। इस आफिस में अब कुछ ही दिन बचे हैं...विशाल ने मन में सोचा।
हां, दीपू बोल...विशाल ने एक ही घंटी में फोन उठा लिया...क्या खबर है...
सर, सीईओ की कल सुबह चेयरमैन से मीटिंग है और कल ही फैसला हो जाएगा...सब कुछ बदलने वाला है...दीपू बहुत खुश था।
ये वही सीईओ जेएस था जिसने चार साल पहले दीपू को नौकरी पर रखने के लिए विशाल से सिफारिश की थी। और आज वही दीपू जेएस का एकदम विरोधी हो गया था। शायद इसीलिए की जेएस को दीपू की चमचागिरी पसंद नही थी। दीपू की मैनेजमेंट से नजदीकी जे.एस को अखरती थी। मैनेजमेंट की आड़ लेकर दीपू कई गलत काम करने लगा था। और हां, दीपू को इस चैनल में लाने वाला जे.एस ही था। कई चक्कर काटे थे दीपू ने जे.एस. के आफिस के...इस चैनल में आने से पहले दीपू विशाल के साथ था। यानि पिछले चार साल से दीपू और विशाल में अच्छी बनती थी। चाहे दीपू की शादी हो या उसके बहन की, विशाल हर जगह उपस्थित रहता था।
दीपू मुझे कुछ नहीं होने देगा। कुछ दिन और कटेंगे...मंदी का दौर है...कहीं और नौकरी मिलना और वो भी सीनियर पोजिशन पर मुश्किल है...विशाल ने सोचा...घर आ गया था।
अरे विशाल फोन उठाओ...कब से बज रहा है...रोमी ने कहा ( रोमी विशाल की पत्नी है)
सुबह, सुबह किसका फोन आ गया...आराम से सोने भी नहीं देते...विशाल बुदबुदा रहा था।
फोन जे.एस. का था...विशाल आज 11:30 पर मीटिंग है...जे.एस. की आवाज आई...काफी खुश लग रहा था जे.एस.
सर एजेंडा क्या है...विशाल ने घबरा कर पूछा।
11:30 पर पता चल जाएगा...दूसरी तरफ से आवाज आई।
लगता है दीपू की बात सच हो गई है। विशाल को दीपू से हुई बातचीत याद आ गई।
सीईओ तो गया...कहीं मेरा नम्बर.........नहीं ऐसा नहीं हो सकता। दीपू ने कहा था कि मै सेफ जोन में हूं...दीपू सब संभाल लेगा...ये सारे विचार विशाल के दिमाग में कौंध रहे थे।
अनमने मन से तैयार होकर विशाल आफिस पहुंचा।
गुड मार्निंग सर...विजया की आवाज थी।
गुड मार्निंग विजया...दीपू आया क्या...
नहीं... विजया बोली।
अपने केबिन में पहुंचते ही विशाल कोट की जेब से मोबाइल निकालने लगा।
कहां गया साला...अम्....ये रहा...अरे बैटरी खत्म होने वाली है। जल्दी से दीपू से खबर लूं...क्या सच में सीईओ गया...विशाल दीपू का नम्बर मिला चुका था।
ये नम्बर इस समय कवरेज एरिया से बाहर है...कुछ देर बाद डायल करें...कहां चला गया ये चुतिया...विशाल को घबराहट होने लगी थी... 11:30 बज चुके थे।
मे आई कम इन सर, विशाल ने जे.एस के कमरे घुसते ही पूछा।
आओ...आओ बैठो...सुमित और नारायणन को भी बुला लो...जे.एस बोला
कुछ ही देर में सुमित और नारायणन भी आ गए।
अब मै आप लोगो के साथ कुछ ही देर हूं...चेयरमैन से बात हो गई है। एम.डी. चैनल को अपने ढंग से चलाना चाहते हैं...सब जे.एस. को हैरान होकर देख रहे थे।
देखो मेरे जाने के बाद सुमित और विशाल डेंजर जोन में हैं। एम.डी इन दोनो से पीछा छुड़ाएगा और विशाल भी...ये दोनो मेरे आदमी हैं...जे.एस. बोले जा रहा था।दीपू ने भी बहुत आग लगाई है सब के बारे में...एक एक आदमी की रिपोर्टिंग की है दीपू ने...साले को इतने साल तक पाल के रखा...सांप को दूध पिलाया है...जे.एस. की आवाज तेज हो गई थी।
विशाल की समझ में नहीं आ रहा था कि एक चमचे की इतनी औकात हो सकती है की वो तख्ता पलट दे...पीछे से जे.एस दीपू को लगातार गालियां दे रहा था। मै तो सेफ हूं...दीपू ने कहा था मुझे कुछ नहीं होगा। विशाल अपना मन पक्का कर रहा था।
सर, मैं आपके साथ हूं...मैं भी आज ही इस्तीफा दे दूंगा...सुमित बोला
नहीं...आप लोग ऐसा कुछ नहीं करेंगे...जब तक एम.डी ना कहे। शायद चैनल को आप जैसे प्रोफेशनल लोगो की जरूरत है...ठीक है...आप लोग अपने अपने कैबिन में जाइए...मै निकलता हूं...जे.एस. ने कहा
विशाल धम्म से अपनी कुर्सी पर गिरा...लगता है आज मेरा आखिरी दिन है इस चैनल में...नहीं ऐसा नहीं हो सकता...दीपू ने कहा था मै सेफ जोन में हूं...मुझे अभी रूकना पड़ेगा...विशाल ये सब सोच रहा था।
विशाल ने अपनी घड़ी देखी...दो बज रहे थे...जे.एस. जा चुका था...स्टाफ में ज्यादा हलचल नहीं है...दीपू भी नहीं दिख रहा है। साले चुतिए को आज ही गायब होना था...विशाल बड़बड़ाया
सर, नीनू ने ज्वायन कर लिया है...दीपू अभी अभी उसे लेकर घुसा है...नीनू एम.डी. के साथ बैठा है...नारायणा का फोन था
नीनू...विशाल हंस रहा था। नीनू और सीईओ वो चपरासी बनने के लायक नही है और एम.डी उसे सीईओ बना रहा है।
एम.डी नही दीपू बना रहा है...नारायणन बोला
ऐसा हो ही नही सकता...दीपू नीनू के बारे में अच्छी तरह से जानता है। नीनू उसका भी तो पैसा लेकर भाग गया था ( नीनू को लोगो से पैसा मांगने की आदत है। और पैसा लेकर वापिस नहीं करता)...विशाल बोला
सर, दीपू नीनू का भी चमचा है...दीपू ने ही नीनू को एम.डी से मिलवाया था और जे.एस. के जाते ही उसे दीपू ने ज्वायन करवा दिया...मै अंदर जा रहा हूं...एम.डी. ने बुलवाया है...शरद बोला
विशाल का सर घूम रहा था। दीपू ने ऐसा क्यो किया...नहीं नहीं ऐसा नही हो सकता...दीपू तो मेरा नजदीकी है...वो ऐसा नहीं कर सकता।
इस चोर के साथ कैसे काम होगा...एम.डी. से बात करता हूं...विशाल ने सोचा
दीपू पूरे न्यूजरूम में छाती चौड़ी करके घूम रहा था। अभी तक वो विशाल से नहीं मिला था या शायद आंखे चुरा रहा था। दीपू की हरकतो से लग रहा था कि ये काम उसी का है। दीपू अब किंग मेकर हो गया था।
साले ने सामने से वार किया है...विशाल बोला...साले की हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी...निशाना एकदम सही लगा है।
सर, अंदर आ जाऊ...विशाल ने एम.डी से पूछा.
हां आओ, बोलो...एम.डी ऐसे ही बात करता था
सर वो...जे.एस. से नहीं बन रही थी आपकी...बहुत दिन लगा दिए डिसीजन लेने में...विशाल कुर्सी पर बैठ चुका था।
कुछ समय चाहिए था दूसरा आदमी ढूढने के लिए...एम.डी. ने बोला
और आपको नीनू ही मिला...और कोई नहीं...विशाल बोला
क्यो क्या खराबी है नीनू में...एम.डी. ने पूछा
विशाल ने एक ही सांस में नीनू की तारीफ में कसीदे पढ़ डाले...एम.डी. हंस रहा था
मेरी इससे नहीं बनेगी...इसके साथ बहुत मुश्किल है काम करना...मै इसको रिपोर्ट नही कर सकता...विशाल ने हंसते हुए बोला
ठीक है कल बात करते हैं...एम.डी ने कहा
ओ.के. सर, गुड नाइट...विशाल उठते हुए बोला...
वापसी सारे रास्ते विशाल दीपू के बारे में सोच रहा था। एक छोटे से बच्चे ने उसे हरा दिया था। उसी बच्चे ने जिसे विशाल ने उंगली पकड़ कर चलना सिखाया था...जिसकी हर गलत बात पर परदा डाल कर रखा...उसके छोटे काम को भी बढ़ा चढ़ा कर दिखाया था...जे.एस. से लड़ा था दीपू के काम को लेकर, जे.एस. की बातो पर विश्वास नहीं किया
खैर सुबह आफिस से फोन आ चुका था, “रिपोर्ट तो नीनू को ही करना पड़ेगा” विशाल का इस आफिस में वो आखिरी दिन था
नाश्ता करते हुए विशाल सोच रहा था “ दीपू किसका चमचा था, उसका, नीनू का,या मैनेजमेंट का ” ये बात विशाल की समझ से बाहर थी।
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